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गेंहू और आटे की बढ़ती कीमतों में जल्द ही गिरावट आ सकती है. सरकार ने गेंहू की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा फैसला किया है. सरकार ने गेंहू स्टॉक के नियमों में बदलाव करते हुए इसे घटा दिया है.

सरकार ने मुनाफावसूली, जमाखोरी और महंगाई को रोकने के लिए गेहूं स्टॉक की लिमिट को घटा दिया है. लिमिट में कटौती इससे पहले भी गेहूं की स्टॉक लिमिट का नियम लगाया गया है. लेकिन जैसी उम्मीद की जा रही थी, वैसा असर दिखा नहीं. भारत सरकार के गेहूं की स्टॉक लिमिट में बदलाव का फैसला 31 मार्च 2025 तक लागू रहेगा.

कितनी घटाई गई गेंहू स्टॉक की लिमिट

केंद्र सरकार ने व्यापारियों के लिए गेहूं भंडारण की सीमा घटा दी है. सरकार ने बुधवार को खुदरा और रिटेल व्यापारियों के लिए गेहूं भंडारण की सीमा को घटा दिया है. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, थोक व्यापारियों के लिए गेहूं के भंडारण की सीमा 2,000 मीट्रिक टन से घटाकर 1,000 मीट्रिक टन कर दी गई है, जबकि खुदरा व्यापारियों के लिए इसे 100 मीट्रिक टन से घटाकर 50 मीट्रिक टन कर दिया गया है.

स्टॉक लिमिट घटाने से क्या होगा फायदा

निचली भंडारण सीमा का उद्देश्य जमाखोरी को रोकना है, जिससे पर्याप्त गेहूं उपलब्ध होने के बावजूद कीमतें बढ़ जाती हैं. सरकार द्वारा कहा गया कि गेहूं का भंडार करने वाली संस्थाओं को गेहूं स्टॉक लिमिट पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा और प्रत्येक शुक्रवार को भंडारण की जानकारी अपडेट करना आवश्यक है. आधिकारिक बयान में कहा गया कि कोई भी संस्था जो पोर्टल पर पंजीकृत नहीं पाई गई या भंडार सीमा का उल्लंघन करती है, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6 और 7 के तहत उचित दंडात्मक कार्रवाई के अधीन होगी.

साथ ही बताया कि यदि उपरोक्त संस्थाओं का गेहूं भंडार उपरोक्त निर्धारित सीमा से अधिक हैं, तो उन्हें अधिसूचना जारी होने के 15 दिनों के भीतर इसे भंडारण की निर्धारित सीमा में लाना होगा. खाद्य सुरक्षा का प्रबंधन करने और जमाखोरी और बेईमान सट्टेबाजी को रोकने के लिए भारत सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापारियों/थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और प्रोसेसरों पर यह सीमा लागू की है. इनपुट-आईएएनएस

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