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बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है. बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं और मंदिरों पर हमले हो रहे हैं. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर जारी हमलों का मुद्दा अब लोकसभा में भी गूंजा है.संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान हैदराबाद से लोकसभा सांसद ओवैसी ने बांग्लादेशी हिंदुओं के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछा.

हिंदू समुदाय की सुरक्षा

एआईएमआईएम नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में सरकार से पूछा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है? इस पर विदेश मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश की स्थिति चिंता का विषय है. वहां अल्पसंख्यकों पर हमले की कई घटनाएं हुई हैं. हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश ऐसे कई कदम उठाएगा जिससे वहां के अल्पसंख्यक सुरक्षित रहें.

एस. जयशंकर ने कहा…

हैदराबाद से लोकसभा सांसद औवेसी के सवाल पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ”बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति चिंता का विषय है. वहां अल्पसंख्यकों पर हमले की कई घटनाएं हुई हैं. हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश अपने हित में ऐसे कदम उठाएगा जिससे अल्पसंख्यक सुरक्षित रहें.’ विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि बांग्लादेश के साथ विकास परियोजनाओं का अच्छा इतिहास है और हमें उम्मीद है कि वहां नए प्रशासन के आने के बाद आपसी सम्मान और लाभकारी संबंध जारी रहेंगे.

ओवैसी ने पूछे ये प्रश्न

ओवैसी ने आज लोकसभा में नेपाल में भारतीय क्षेत्र को दर्शाने वाले करेंसी नोटों की छपाई, म्यांमार से भारत में आने वाली दवाओं, बांग्लादेश में हिंदुओं और मंदिरों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम और पावरलूम पर बांग्लादेश से कपड़ा डंप करने के प्रभाव के बारे में बात की। भारत में उद्योग से संबंधित प्रश्न पूछे।

विदेश मंत्री ने दिया ऐसा जवाब…

नेपाल से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अपनी सीमाओं पर भारत की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है. अगर हमारे पड़ोसियों को उम्मीद है कि भारत कुछ करके अपना रुख बदल लेगा तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि ऐसा नहीं होगा. म्यांमार के बारे में विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि म्यांमार की अशांत स्थिति के कारण उन्हें उनके साथ खुली व्यवस्था नीति की समीक्षा करनी पड़ी है, लेकिन वह सीमावर्ती समुदायों की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हैं.

आतंकवाद मुक्त संबंध

पाकिस्तान से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ आतंकवाद मुक्त संबंध चाहता है और ऐसे में गेंद इस्लामाबाद के पाले में है. उन्होंने कहा, ”हम शांति चाहते हैं. हम पाकिस्तान के साथ भी अच्छे संबंध चाहते हैं, लेकिन हम आतंकवाद से मुक्त संबंध चाहते हैं.’ अब यह पाकिस्तानी पक्ष को दिखाना है कि वे अतीत के व्यवहार को बदल रहे हैं या नहीं, अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है. विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार में रुकावट 2019 में पाकिस्तान सरकार के फैसले के कारण थी.

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