डॉ. सचिन श्री
( Editor in Chief’ )
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सभी प्रकार के भ्रमों को दूर करें, 6 जुलाई (दिन रविवार) को मनाई जाएगी देवशयनी एकादशी
देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2025) आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। देवशयनी एकादशी के बाद जो समय आता है,उस समय के इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं जिसे चातुर्मास कहते हैं।
समय अंतराल में विवाह,etc जैसे मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। इस साल यह व्रत कब रखा जाएगा? आइए इसकी डेट जानते हैं।
सनातन धर्म के पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 05 जुलाई को शाम 06 बजकर 58 मिनट पर होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 06 जुलाई को शाम 09 बजकर 14 मिनट पर होगी। ऐसे में इस साल 06 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
देवशयनी एकादशी का महत्व पुराणों में विशेष रूप से बताया गया है। इस दिन से भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, और पूरी सृष्टि का कार्यभार देवों के देव महादेव भगवान भोलेनाथ को सौंप देते हैं। इसी वजह से चातुर्मास के दौरान भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। इस अवधि में तपस्या, योग, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान करने से दोगुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
देवशयनी एकादशी के दिन क्या करें…..
- देवशयनी एकादशी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले कपड़े पहनें।
- भगवान विष्णु का श्री विग्रह को स्थापित करें।
- भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप और तुलसी दल आदि अर्पित करें।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का ..108 बार जाप करें।
- देवशयनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
- व्रत का संकल्प लें और श्रद्धा अनुसार व्रत का पारण करें।
- ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
- तामसिक चीजों से परहेज करें।
- इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन गलती से भी न करें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। www.AapkiTv.in अंधविश्वास के खिलाफ है।
