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बांग्लादेश के अंदर क्या चल रहा है. यह न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय बन गया है. बांग्लादेश में जो घटनाएं घट रही हैं, वे सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं.

खासकर, पाकिस्तानी-अमेरिकी व्यवसायी साजिद तारार के हालिया खुलासे ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है. अमेरिका के बाल्टीमोर में रहने वाले एक प्रमुख पाकिस्तानी-अमेरिकी बिजनेसमैन और राजनीतिज्ञ साजिद तरार ने कई बड़े खुलासे किए. इन खुलासों ने बांग्लादेश का काला सच सभी के सामने लाकर रख दिया है.

पाकिस्तानी ने खोली बांग्लादेश की सच्चाई

साजिद तरार के अनुसार बांग्लादेश के मोहम्मद युनूस की सरकार ने एक ओर जहां अल्पसंख्यक धर्मगुरुओं से मिलकर वातावरण सुधारने की बात की है. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान से युद्ध सामग्री और अत्याधुनिक हथियारों की खरीदी भी जारी रखी है. तारार के अनुसार, बांग्लादेश ने पाकिस्तान से न केवल 25,000 टन चीनी खरीदी है. बल्कि 40 टन RDX, 28,000 हाई-इंटेंसिटी प्रक्षेप्य, 2,000 टैंक शेल्स और 40,000 गोलियों की भी मांग की है. यह दावा भारत के लिए चिंता का एक बड़ा कारण बन गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी की ओर इशारा करता है.

भारत के खिलाफ रची जा रही साजिश

साजिद तारार ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि बांग्लादेश का पाकिस्तान से हथियारों और विस्फोटकों की मांग, भारत के खिलाफ किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है. उन्होंने भारत को चेतावनी दी कि उसे अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए, क्योंकि “अल-जिहाद, अल-जिहाद” जैसे नारे भारत के दोनों सीमाओं पर उठ रहे हैं. यह संकेत इस बात की ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच की सैन्य सहयोग भारत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.

पाकिस्तान के करीब जा रहा बांग्लादेश

तारार ने यह भी खुलासा किया कि बांग्लादेश सरकार ने पाकिस्तान से संबंधों को और मजबूत किया है. उन्होंने बताया कि बांग्लादेश ने पाकिस्तानियों के लिए वीजा आवेदन की शर्तों को भी आसान बना दिया है, जिससे पाकिस्तान से बांग्लादेश में आने वालों के लिए प्रतिबंध हटाए गए हैं. पहले पाकिस्तान से वीज़ा लेने के लिए अनिवार्य NOC (No Objection Certificate) की जरूरत थी. लेकिन अब यह शर्त हटा दी गई है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी को स्पष्ट करता है.

कुछ भारतीय विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश के खिलाफ पाकिस्तान का बढ़ता समर्थन उसी तरह की घटनाओं की ओर इशारा करता है, जैसी कि बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के शासन में देखने को मिली थीं. 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2005 तक बांग्लादेश ने आतंकवादी समूहों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, मसूद अजहर और सज्जाद अफगानी को अपनी सरजमीं से पाकिस्तान की ओर भेजा था, जिससे मुम्बई हमले जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया था. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ये आतंकवादी बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे थे, और इसके चलते बांग्लादेश की भूमि को आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया था.

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