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पूर्व राष्ट्रपति और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की फोटो करेंसी नोटों से हटाए जाने के बाद अब ‘जॉय बांग्ला’ देश का राष्ट्रीय नारा नहीं रहेगा. बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद यूनुस सरकार की याचिका पर यह फैसला दिया है.

सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें जॉय बांग्ला को नेशनल स्लोगन बनाए जाने और सरकार के सभी कार्यक्रमों में इसका उपयोग किए जाने का आदेश दिया गया था, जिसके खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल पेटीशन दाखिल की थी.

अगस्त महीने में बांग्लादेश में हुए तख्तापलट और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़कर भागे जाने के बाद मोहम्मद यूनुस सरकार बड़े-बड़े बदलाव कर रही है. इसी महीने करेंसी नोट से मुजीबुर्रहमान की फोटो हटाकर धार्मिक संरचनाएं, बंगाली परंपराओं और जुलाई में हुए छात्र आंदोलन के दौरान बनाए गए ‘ग्रैफिटी’ को नोटों पर छापने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अब राष्ट्रीय नारे को बदलने की तैयारी है.

मंगलवार (10 दिसंबर, 2024) को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सैयद रिफात अहमद ने सरकार की याचिका पर फैसला दिया है कि ‘जॉय बांग्ला’ अब से देश का नेशनल स्लोगन नहीं है. सरकार का पक्ष रखने के लिए कोर्ट में पेश हुए एडिशनल अटॉर्नी जनरल अनीक आर हक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जॉय बांग्ला का राष्ट्रीय नारा नहीं माना जाएगा.

इससे पहले 10 मार्च, 2022 के अपने आदेश में हाईकोर्ट के जज जस्टिस एफआरएम नाजमुल अशन और जस्टिस केएम कमरुल कादर की बेंच ने जॉय बांग्ला को देश का राष्ट्रीय नारा घोषित करते हुए आदेश दिया था कि देश के सभी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों की असेंबली में इस स्लोगन का इस्तेमाल किया जाए, जिसके खिलाफ 2 दिंसबर को सरकार ने याचिका दाखिल की थी. सबसे पहले साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. बशीर अहमद ने रिट पेटीशन दाखिल करके इसे नेशनल स्लोगन घोषित किए जाने की मांग की थी.

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