अखबार या टीवी में अब बस बांग्लादेश (Bangladesh) की अशांति की सुर्खियां छाई हुई हैं। हसीना सरकार के पतन और अंतरिम सरकार बनने के बाद देश में लगातार हिंसा और अशांति का माहौल बना हुआ है।
अपने ही देश के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने के बाद अब बांग्लादेश का एक तबका भारत के खिलाफ लगभग ‘युद्ध’ का ऐलान कर रहा है।
इस बीच विवाद बढ़ाने के बाद खुद ही मुसीबत में फंस गया है पड़ोसी देश। अब रोज़मर्रा की जरूरी चीजें कैसे जुटाई जाएं, इसे लेकर बांग्लादेश सरकार परेशान है।
जीवन-जरूरी चीजों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश (Bangladesh)
मुख्यतः कृषि प्रधान देश बांग्लादेश (Bangladesh)। लेकिन देश में उतना उत्पादन नहीं है जिससे जरूरतें पूरी हो सकें। नतीजतन, मामूली रोजमर्रा की चीजों के लिए भी भारत पर निर्भर रहना पड़ता है। चाहे इलाज हो, या आलू-प्याज जैसी जरूरी चीजें, बांग्लादेश को भारत से मदद लेनी पड़ती है। दूसरी ओर, देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और भारत विरोधी रवैये के कारण बार-बार सीमा बंद करने की मांग उठ रही है।
विकल्प खोज रही है यूनुस सरकार:
ऐसी स्थिति में अगर भारत निर्यात बंद कर देता है, तो बांग्लादेशियों (Bangladesh) को भूखे रहना पड़ सकता है। यही वजह है कि यूनुस सरकार जल्द से जल्द विकल्प तलाशने में जुट गई है। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश के ट्रेड एंड टैरिफ कमीशन ने आलू और प्याज के आयात के लिए कुछ वैकल्पिक देशों के बारे में सोचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
किन देशों पर विचार कर रहा है बांग्लादेश:
मिली जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश (Bangladesh) आलू के आयात के लिए जर्मनी, मिस्र, चीन और स्पेन पर विचार कर रहा है। वहीं, प्याज के लिए चीन, पाकिस्तान और तुर्की का नाम लिया जा रहा है। लेकिन इन देशों से आयात करने में लागत कितनी आएगी, यह यूनुस सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, पहले भारत से रोजाना 40-50 प्याज के ट्रक बांग्लादेश (Bangladesh) भेजे जाते थे। अब, हालांकि निर्यात पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है, लेकिन आपूर्ति में उल्लेखनीय कमी आई है। अब केवल 10-12 ट्रक ही बांग्लादेश पहुंच रहे हैं। बांग्लादेश में प्याज की सालाना मांग लगभग 27.28 लाख टन है। पिछले वित्त वर्ष में भारत से लगभग 200 मिलियन डॉलर की प्याज का आयात किया गया था। अब इसका विकल्प खोजने में बांग्लादेश जुटा हुआ है।
