Dr. Sachin Shree
(Gold Medal Awardee)
(Editor in chief- www.AapkiTv.in)
बशीर बद्र साहब का एक शेर है. दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों. दिल्ली का दंगल जो न कराए. दोस्त भी दुश्मन बन चुके हैं. अब दुश्मनी भी ऐसी कि सारी गुंजाइश खत्म हो चुकी है.
कल तक जो साथ मिलकर भाजपा को हराने में जुटे थे, आज वे खुद एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन चुके हैं. दिल्ली के दंगल में आप और कांग्रेस आमने-सामने है. राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन में दरार पर मुहर लगा दी है. दिल्ली में 5 फरवरी को वोटिंग है. नतीजे 8 फरवरी को आएंगे.
राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली चुनाव में पहली रैली की. उन्होंने भाजपा और आप को बराबर धोया. इतना बोला कि अब कांग्रेस-आप की फ्रेंडली फाइट की कोई संभावना नहीं. राहुल गांधी ने साफ कह दिया कि अरविंद केजरीवाल और पीएम मोदी में कोई फर्क नहीं. आप चीफ अरविंद केजरीवाल भी प्रधानमंत्री की तरह ही प्रचार-प्रसार और झूठे वादे करने की रणनीति पर अमल करते हैं. अरविंद केजरीवाल भी चुप नहीं बैठे. उन्होंने तपाक से कह दिया कि राहुल गांधी की लड़ाई अपनी पार्टी बचाने की है, जबकि आम आदमी पार्टी की लड़ाई देश बचाने की है.
हरियाणा की ‘दोस्ती’, दिल्ली में दुश्मनी
अब सवाल है कि आखिर राहुल गांधी अचानक अरविंद केजरीवाल से दुश्मनी क्यों निभाने लगे. अब तक डायरेक्ट अटैक से बच रहे थे, मगर अब खुद क्यों हमलावर हो गए. हरियाणा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आप संग गठबंधन के लिए राहुल ने क्या-क्या नहीं किया. भूपेंद्र हुड्डा तक से भिड़ गए. राहुल चाहते थे कि हरियाणा में आप और कांग्रेस का गठबंधन हो. मगर हुड्डा के सामने उनकी नहीं चली. आखिरकार आप और कांग्रेस का गठबंधन नहीं हुआ. राहुल गांधी अब तक आम आदमी पार्टी पर डायरेक्ट अटैक से बच रहे थे. मगर अब उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है.
राहुल के सामने अब यही विकल्प
हरियाणा और महाराष्ट्र कांग्रेस हार चुकी है. लगातार मिल रही हार से कांग्रेस सदमे में है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने की अब जरूरत है. राहुल गांधी भी इस बात को अच्छे से समझ रहे हैं. अब उनके लिए दिल्ली में करो या मरो वाली स्थिति है. दिल्ली चुनाव कांग्रेस अब पूरी ताकत से लड़ रही है. यही वजह है कि राहुल गांधी दिल्ली के रण में खुद उतर चुके हैं. पार्टी की कमान संभाल चुके हैं. सियासी पंडितों का मानना है कि राहुल गांधी अरविंद केजरीवाल और आप सरकार पर जब तक सीधे अटैक नहीं करेंगे, तब तक कांग्रेस के लिए रास्ता बना पाना मुश्किल है.
आखिर क्यों बदला राहुल का मिजाज
हालांकि, राहुल गांधी को पर्सनल अटैक करने पर खुद आम आदमी पार्टी ने मजबूर किया है. बीते दिनों आम आदमी पार्टी ने इंडिया गठबंधन से कांग्रेस को बाहर करने की मांग कर दी थी. राहुल गांधी को लगता है कि सहयोगियों की ओर से दोस्ती की लक्ष्मण रेखा पार कर दी गई है. अब कोई भी दोस्त नहीं रहा. सब अपनी सियासी रोटियां सेकने में लगे हैं. यही वजह है कि राहुल गांधी ने मन बना लिया है कि अब वह फ्रंटफुट से खेलेंगे. वह अब दोस्ती-दुश्मनी का लिहाज नहीं रखेंगे. वह कांग्रेस को जीत दिलाने के लिए सबकुछ करेंगे. चाहे सामने भाजपा हो या आम आदमी पार्टी.
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