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बांग्लादेश के चटगांव की एक अदालत ने मंगलवार को गिरफ्तार हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की जमानत की सुनवाई एक महीने के लिए स्थगित कर दी थी.क्योंकि उनके पास पैरवी के लिए कोई वकील नहीं था. कई संगठनों का दावा था कि जेल और जानमाल की डर से कोई भी वकील चिन्मय दास का केस लड़ने को तैयार नहीं है. क्योंकि पहले ही 70 वकीलों पर कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है. ऐसे में अब अमेरिका को हिंदू पुजारी का साथ मिला है. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने वाशिंगटन में कहा कि बांग्लादेश को सभी बंदियों के लिए बुनियादी मानवाधिकार सिद्धांतों के तहत उचित कानूनी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने यह बात तब कही, जब एक रिपोर्टर ने पुजारी पर अमेरिका की प्रतिक्रिया जाननी चाही, जिन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है, उन्हें गिरफ्तार किए जाने और जेल जाने के बाद से बांग्लादेश में उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए “कोई इच्छुक वकील” नहीं मिला. पटेल ने कहा कि उनका विचार “उसी के अनुरूप” है, जिसकी अमेरिका हर सरकार से अपेक्षा करता है.

उन्होंने कहा कि मौलिक स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और बुनियादी मानवाधिकारों के प्रति सम्मान होना चाहिए. वेदांत पटेल ने कहा कि किसी भी तरह का विरोध “शांतिपूर्ण होना चाहिए” और किसी भी कार्रवाई के दौरान सरकारों को कानून के शासन का सम्मान करना चाहिए और बुनियादी मानवाधिकारों को बनाए रखना चाहिए. यह कुछ ऐसा है जिस पर हम जोर देते रहेंगे.

वहीं, ढाका में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने भारतीय पत्रकारों को हिंदुओं के उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने और वास्तविकता की रिपोर्ट करने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि हम भारत सरकार को यह समझाने और गलत सूचना का मुकाबला करने के लिए काम कर रहे हैं. यूनुस ने राजनेताओं को “उकसाने” के प्रयासों से दूर रहने की सलाह दी. हिंदुओं पर लगातार हमलों की रिपोर्टों को “प्रचार” के रूप में खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि दुनिया को यह बताना जरूरी है कि “बांग्लादेश एकजुट है और विदेश से किसी भी मनगढ़ंत कहानी के खिलाफ है. बता दें कि यूनुस ने गुरुवार को धार्मिक नेताओं के साथ एक और बैठक बुलाई है.

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