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दिल्ली की पश्चिमी इलाके में स्थित ‘विधवा कॉलोनी’ का नाम बदलकर अब गुरु गोबिंद सिंह की मां माता गुजरी के नाम पर रखा गया है। इस महत्वपूर्ण बदलाव का ऐलान दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने किया।

उन्होंने इसे सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।

पिछले वर्ष ही नाम बदलने का दिया था निर्देश

1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद बनी इस कॉलोनी में मुख्य रूप से उन परिवारों के सदस्य रहते हैं, जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खोया। यहां की विधवाओं के सुझाव पर पिछले वर्ष उपराज्यपाल ने कॉलोनी का नाम बदलने का निर्देश दिया था। गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर इस नए नाम की घोषणा की गई।

पीड़ित परिवारों के लिए रोजगार और राहत प्रयास

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने यह भी बताया कि दंगा पीड़ितों के परिजनों को रोजगार के प्रस्ताव वितरित किए गए हैं। इसके साथ ही लंबे समय से लंबित भर्ती पात्रता में छूट को भी मंजूरी दी गई। यह कदम प्रभावित परिवारों को सामाजिक और आर्थिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बांग्लादेशी नागरिकों पर कड़ी कार्रवाई

दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों पर भी प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पिछले छह दिनों में सेंट्रल दिल्ली पुलिस ने नौ बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इनमें से सात को नवी करीम स्थित एक होटल से पकड़ा गया, जहां वे फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे थे। पुलिस के अनुसार, कुछ बांग्लादेशी नागरिक ‘डंकी रूट’ के जरिए भारत में दाखिल हुए थे। यह अवैध मार्ग पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा से होते हुए दिल्ली तक पहुंचता है। अब तक कुल 14 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर उनके दस्तावेज़ों की जांच के लिए फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) भेजा गया है। माता गुजरी कॉलोनी का नाम न केवल पीड़ितों के लिए सम्मान का प्रतीक है, बल्कि यह प्रशासन के संवेदनशील रवैये को भी दर्शाता है।

By admin

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