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दक्षिण पश्चिम व दक्षिणी जिला पुलिस ने जिन 15 बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट किया, उनमें से आठ एक ही परिवार के थे। पति-पत्नी और उनके छह बच्चे। यह परिवार पहले पहचान छिपाकर रंगपुरी के बंगाली बस्ती में रहता था।

छह महीने पहले ही श्मशान स्थल के पास नरेंद्र नामक व्यक्ति के प्लॉट पर किराए का कमरा लिया।

सभी कागजात कर दिए थे नष्ट, सत्यापन में पकड़े गए

इसी प्लॉट पर कबाड़ की दुकान खोली। परिवार ने बांग्लादेश से जुड़े अपने पहचान संबंधी सभी दस्तावेज नष्ट कर दिए थे और खुद को बंगाली बताते थे। भाषा, कद-काठी और रंग-रूप के मामले में बंगाली और बांग्लादेशी में अंतर कर पानी मुश्किल है। हालांकि सत्यापन में जब इनकी असलियत सामने आयी तो पुलिस ने इन्हें वापस इनके देश भेजने में देर नहीं लगाई।

कबाड़ी का काम करता था बांग्लादेशी परिवार

दक्षिण पश्चिम जिला स्थित वसंत कुंज दक्षिण थाना की टीम ने रंगपुरी में बंगाली बस्ती और उसके आस-पास के 400 परिवारों की जांच के बाद उनसे मिले दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन फार्म (फार्म-12) भरवाया। ये फार्म उनके बताए पते पर बंगाल भेजे गए। इसके अलावा भौतिक सत्यापन के लिए एक विशेष टीम को भी बंगाल में भेजा गया। वहां 400 लोगों में से आठ के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, जो एक ही परिवार के थे।

वापस बांग्लादेश भेजा गया

पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि जहांगीर, उसकी पत्नी परीना बेगम, उसके चार बेटे-जाहिद, आहिद, सिराजुल, वाहिद और दो बेटियां फातिमा व आशिमा दिल्ली में रंगपुरी इलाके में अवैध रूप से रह रहे थे। सभी मूल रूप से बांग्लादेश के मदारीपुर जिला स्थित केकरहाट गांव के रहने वाले हैं। इन्हें एफआरआरओ के समक्ष पेश कर वापस बांग्लादेश भेज दिया गया है।

पूछताछ में आरोपित जहांगीर ने बताया कि वह भारत में जंगल के रास्तों से प्रवेश करने के बाद ट्रेन से दिल्ली आया था। यहां नौकरी व रहने की व्यवस्था करने के बाद पत्नी परीना बेगम व छह बच्चों को भी लेकर दिल्ली आ गया। रंगपुरी में वह अपनी मूल पहचान छिपा कर रह रहा था। पुलिस से बचने के लिए उसने अपने सारे बांग्लादेशी कागजात भी नष्ट कर दिए थे।

पड़ोसियों को धमकाता था बड़ा बेटा जाहिद

रंगपुरी गांव निवासी सोनू व गौरव ने बताया कि परिवार छह महीने पहले ही बंगाली बस्ती से यहां शिफ्ट हुआ था। सबसे बड़ा बेटा जाहिद इलाके में नशे का सामान बेचता था। मना करने पर पास-पड़ोस के लोगों को धमकाता था, परेशान करता था। वहीं दूसरा बेटा रंगपुरी में ही परचून की दुकान पर काम करता था।

वहीं, परिवार के बाकी लोग जहांगीर के साथ कबाड़ के काम में हाथ बंटाते थे। पुलिस ने एक हफ्ते पहले जब इन लोगों को पकड़ा तो यकीन ही नहीं हुआ। ये लोग खुद के बंगाली बताते थे।

अर्जनगढ मेट्रो स्टेशन के पास से सात बांग्लादेशी पकड़ाए

दक्षिणी जिला पुलिस ने 28 दिसंबर को अर्जनगढ़ मेट्रो स्टेशन के पास से सात बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया। इनमें पांच महिलाएं शामिल हैं। पुलिस उपायुक्त अंकित चौहान ने बताया कि सभी अवैध तरीके से बांग्लादेश से भारत आए थे। उनके मोबाइल की जांच में बांग्लादेशी नागरिकता के पहचान पत्र और मोबाइल नंबर भी मिले।

आरोपितों में मोहम्मद उमर फारुक, रियाज मियां उर्फ रेमन खान व पांच महिलाएं हैं। सभी बांग्लादेश के नेत्रोकोना जिला स्थित फूलपुर गांव के रहने वाले हैं। गुरुग्राम (हरियाणा) के राजीव नगर में रहकर मजदूरी करते हैं। अर्जनगढ़ मेट्रो स्टेशन के पास भी सभी आरोपित काम की तलाश में पहुंचे थे।

बांग्लादेशियों के नागरिकता के पहचान संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि के बाद उन्हें आरके पुरम स्थित एफआरआरओ के समक्ष पेश करने के बाद इंद्रलोक स्थित डिटेंशन सेंटर भेजा गया। उसके बाद वहां से उन्हें बांग्लादेश भेजा दिया गया।

By admin

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