असम के कछार जिले के सौ से ज़्यादा लोगों ने नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी से संपर्क किया है और उनसे नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ओर से अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित हिंसा की निंदा करने का आग्रह किया है।
तीन वकीलों और 107 नागरिकों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन कछार जिला आयुक्त को सौंपा गया है।
ज्ञापन में यूनुस की अंतरिम सरकार पर हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ़ जारी हिंसा और उत्पीड़न में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है,’यह पत्र बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ़ किए गए अत्याचारों की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जो नोबेल शांति पुरस्कार के आदर्शों -शांति,न्याय और मानवीय गरिमा को कमज़ोर करता है।’
यूनुस के खिलाफ आरोप
हस्ताक्षरकर्ताओं का तर्क है कि हिंसा की ये घटनाएं अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर किए जा रहे व्यापक,व्यवस्थित अभियान का हिस्सा हैं। उन्होंने आगे कहा,’बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने में डॉ. यूनुस की विफलता के कारण विभिन्न क्षेत्रों से उनकी निंदा बढ़ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सार्वजनिक रूप से उन पर इन हिंसक हमलों और सामूहिक हत्याओं के पीछे ‘मास्टरमाइंड’ होने का आरोप लगाया है।’
ज्ञापन में नोबेल शांति पुरस्कार की सत्यनिष्ठा के बारे में चिंता जताई गई है,अगर यह पुरस्कार ऐसे व्यक्तियों को दिया जाता है,जिनके कार्य हिंसा और उत्पीड़न में योगदान देते हैं। इसमें कहा गया है,’डॉ. यूनुस,जिन्हें कभी समाज सुधारक के रूप में जाना जाता था,अब उन्हीं समुदायों के उत्पीड़न का पर्याय बन गए हैं,जिनकी रक्षा के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाता है।’
पत्र में यह स्वीकार किया गया है कि यूनुस का नोबेल शांति पुरस्कार रद्द करना संभव नहीं है,लेकिन समिति से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। इसमें यूनुस के नेतृत्व में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ चल रही हिंसा और भेदभाव की निंदा करने वाले बयान की मांग की गई है। इसमें कहा गया है,’इस मुद्दे पर चुप्पी को उनके प्रशासन के तहत हो रहे अत्याचारों की मौन स्वीकृति के रूप में देखा जाएगा।’
ज्ञापन में यह भी अनुरोध किया गया है कि यूनुस को नोबेल पुरस्कार विजेता के रूप में उनकी नैतिक जिम्मेदारियों की याद दिलाई जाए। इसमें उनसे इन गंभीर मुद्दों को संबोधित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आह्वान किया गया है। इसके अतिरिक्त, इसमें भविष्य के पुरस्कार विजेताओं के लिए मानदंडों के पुनर्मूल्यांकन की अपील की गई है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया को मजबूत करने का आग्रह किया है ताकि भविष्य में पुरस्कार पाने वाले लोग शांति,न्याय और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों को निरंतर बनाए रखें। वे इस बात पर जोर देते हैं कि पुरस्कार पाने वालों को हिंसा या भेदभाव को बढ़ावा देने में शामिल नहीं होना चाहिए।
