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प्रयागराज में अगले साल आयोजित हो रहे कुंभ में हिंदू आचार संहिता को जारी किया जाएगा. सैकड़ों वर्षों में हिंदू समाज के लोगों में आईं कुरीतियों को दूर करने और मर्यादित आचरण को बढ़ावा देने के लिए हिंदू आचार संहिता को तैयार कर लिया गया है.

धर्म आधारित आचार संहिता शादियों में बढ़ती फिजूलखर्चियों, दिन में विवाह को सर्वोत्तम समेत कई चीजों के बारे में बताया गया है.

आचार संहिता में कन्यादान को श्रेष्ठ दान बताते हुए दहेज को निषेध किया गया है. इसके अलावा कन्या भ्रूण हत्या को पाप बताते हुए पुरुषों के समान महिलाओं के अधिकार स्थापित किए हैं. साथ ही कहा गया है कि महिलाएं भी यज्ञ आदि कर सकती हैं. इस आचार संहिता पर पिछले 15 वर्षों से कार्य हो रहा था. हजारों धर्मगुरुओं व विद्वानों से विमर्श के बाद इसे तैयार किया गया है.

दिन में की गई शादी को माना गया है श्रेष्ठ

आचार संहिता को कुंभ में विहिप (विश्व हिंदू परिषद) के संत सम्मेलन में देशभर से मौजूद संतों के समक्ष रखा जाएगा, फिर व्यापक विचार-विमर्श के बाद इसे जारी किया जाएगा. हिंदू आचार संहिता के मुताबिक सूर्य को साक्षी मानकर दिन में की गई शादी को श्रेष्ठ माना गया है. बताया गया है कि इसमें संपूर्ण जगत के देवताओं व नारायण स्वरूप भगवान सूर्य का सानिध्य प्राप्त होता है. इसके अलावा मंदिरों में अनुसूचित जाति के लोगों के प्रवेश पर मनाही तथा अस्पृश्यता को शास्त्र सम्मत न बताते हुए कहा गया है कि यह परतंत्रता के चलते कुरीति आई है. इसमें बताया गया है कि जाति आधारित छूआछूत वैदिक परंपरा नहीं है.

घर वापसी को माना गया है सही

आचार संहिता में घर वापसी को लेकर भी बताया गया है. ऐसे में अगर कोई किसी अन्य धर्म से हिंदू धर्म में दूसरे धर्म से वापस आना चाहता है तो वह आ सकता है. इसमें बताया गया है कि शास्त्रों के अनुसार, जन्म से हर व्यक्ति हिंदू है. ऐसे में जो भी ब्राह्मण उनकी शुद्धि कराएगा. वह उसे अपना गोत्र देगा.

By admin

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