महाराष्ट्र में एक बार फिर खेला हो गया है. क्या एकनाथ शिंदे फिर से देवेंद्र फडणवीस की चिंता बढ़ा दी है? देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री पद पर शपथ लेने के बाद भी शिवेसना चीफ एकनाथ शिंदे के तेवर शायद नरम नहीं पड़े हैं.
प्रदेश की सियासत में फिर एक बड़ा तूफान आने के संकेत मिल रहे हैं. दरअसल देवेंद्र फडणवीस को शपथ लिए 100 घंटे से ज्यादा का वक्त हो गया है, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक प्रदेश में गृहमंत्री पद का ऐलान नहीं किया गया है. इसको लेकर महायुति में क्या फिर से टेंशन बढ़ गई है.
महायुति में चल रहा सब ठीक
महायुति में सब ठीक चल रहा है या नहीं. यह सवाल हर किसी के जहन में बना हुआ है. दरअसल चुनाव नतीजों के बाद लंबा वक्त सीएम चेहरे तय करने में लगा. आखिरकार सीएम चेहरे पर मुहर लगी तो अब बाकी मंत्रालयों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. गृहमंत्रालय को लेकर भी सुर्खियों का बाजार भी गर्म है.
एकनाथ शिंदे ने बढ़ा दी चिंता
एकनाथ शिंदे ने चुनाव नतीजों के बाद से ही महायुति में चिंता बढ़ा रखी है. अपनी मांगों को लेकर उन्होंने ऐसा कोई दांव चला है कि कोई भी निर्णय आसानी नहीं लिया जा रहा है. दरअसल एकनाथ शिंदे ने डिप्टी सीएम के साथ गृहमंत्रालय भी शिवेसना को देने की मांग रखी थी. शायद यही वजह है कि सीएम शपथ ग्रहण समारोह तक कुछ मिनटों पहले तक भी यह साफ नहीं हो पा रहा था कि आखिर एकनाथ डिप्टी सीएम की शपथ लेंगे या नहीं.
अजित पवार से नजदीकी
सूत्रों की मानें तो देवेंद्र फडणवीस पहले ही मन बना चुके हैं कि गृहमंत्रालय एनसीपी को देंगे. क्योंकि बीजेपी ये वादा उनसे पहले ही कर चुकी है. इसके मुताबिक वित्त प्लानिंग अजित पवार की टीम के पास होगी. लेकिन एकनाथ शिंदे अड़े हैं उनके नेता को ही गृहमंत्रालय दिया जाए. अब देवेंद्र फडणवीस की नजदीकी तो अजित पवार से है ही यही कारण है कि चुनाव नतीजे आते ही अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के सीएम नाम पर मुहर लगा दी थी. इससे पहले भी वह देवेंद्र फडणवीस के साथ डिप्टी सीएम की शपथ ले चुके हैं.
तो यहां पर बन सकती है बात
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब शिवसेना शिंदे के पास ज्यादा विकल्प नहीं है. ऐसे में बीजेपी की ओऱ से शिवसेना को शहरी विकास, राजस्व PWD जैसे विभाग दिए जा सकते हैं. अगर इन पर दोनों के बीच समझौता बैठ जाता है तो महायुति भी सब ठीक चलता रहेगा. वरना आगे पीछे कोई नया खेला हो सकता है.
