यहां पर अभी तक अलग-अलग कक्षाओं के पाठ्यक्रमों में गोस्वामी तुलसीदास कृत गीतावली, विनय-पत्रिका, कृष्ण-गीतावली, बरवै रामायण, दोहावली और कवितावली के दोहे, चौपाइयां पढ़ाई की जाती रहीं। यह पहला अवसर है जब सुंदरकांड को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। हिंदी विषय के बोर्ड आफ स्टडी के समन्वयक व एलबीएस गोंडा के आचार्य प्रो. शैलेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि बीए चतुर्थ \ एमए प्रथम वर्ष का नया पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसी में सुंदरकांड को शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बीए यदि प्रथम वर्ष उत्तीर्ण कर विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ता है तो उसे सर्टिफिकेट, दो वर्ष बाद पढ़ाई छोड़ता है तो डिप्लोमा, तीन वर्ष की पढ़ाई पूरी करता तो डिग्री की उपाधि मिलेगी। यह वह चार वर्ष बाद पढ़ाई छोड़ता है तो उसे डिग्री विथ रिसर्च की उपाधि दी जायेगी, इसे एमए प्रथम वर्ष की मान्यता दी गई है। इसके बाद एक वर्ष में ही विद्यार्थी परास्नातक की पढ़ाई पूर्ण कर सकेगा।