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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. बीआरआई यानी बेल्ट रोड इनिशिएटिव की महत्वकांक्षी परियोजना के तौर पर चीन पाकिस्तान में CPEC बना रहा है.

म्यांमार में भी एक ऐसा ही इकॉनोमिक कॉरेडोर का काम जारी है. जिसका नाम है चाइना म्यांमार इकॉनोमिक कॉरेडोर (CMEC). लेकिन अब ये कॉरेडोर विद्रोहियों के निशाने पर है. पिछले कुछ सालों में इन प्रोजेक्ट पर कई हमले भी हुए. म्यांमार में 2021 से सेना सत्ता पर काबिज है और लगातार देश गृह युद्ध में फंसा हुआ है. सेना के खिलाफ कई विद्रोही गुट लड़ रहे हैं. देश में हिंसा बढ़ती जा रही है. इससे चीन के प्रोजेक्ट पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं.

चीनी सेना की म्यांमार में होगी तैनाती
इसी नवंबर में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने म्यांमार के सैन्य नेताओं से मुलाकात की. म्यांमार के जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने चीन का दौरा किया. चूंकि चीन म्यांमारी सेना का समर्थन कर रहा है तो विद्रोहियों के वो सीधे निशाने पर आ गया है. ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान में बलूच विद्रोहियों के निशाने पर चीनी प्रोजेक्ट और उनके लोग हैं. चीन ने अपने प्रजेक्ट और लोगों की सुराक्षा के लिए खुद के सुरक्षाबलों को तैनात करने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन म्यांमार की सेना के साथ मिलकर एक सिक्योरिटी कंपनी बनाने जा रहा है. जिसका मकसद होगा चीन के निवेश और लोगों की सुरक्षा करना है. ये काम चीन इसलिए कर रहा है म्यांमार की सेना सुरक्षा दे पाएगी, इसका उसे भरोसा नही.

चीन के अरबों डॉलर फंसे म्यांमार में
चाइना म्यांमार इकॉनोमिक कॉरिडोर के नाम पर तक चीन ने 13 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश कर चुका है. इसमें रणनीतिक परियोजनाओं जैसे महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे पाइपलाइन और रेलवे शामिल हैं. पाकिस्तान मे CPEC के जरिए चीन अरब सागर तक अपनी पहुंच रहा है तो म्यांमार से रास्ते हिंद महासागर तक पहुंचना चाहता है. चीन म्यांमार में बंदरगाह को भी डेवलप कर रहा है. साल 2020 की शुरूआत में चीन के राष्ट्रपति शी जिंपिग ने म्यांमार का दौरा किया था. इस दौरे का मक्सद था कि BRI के लिए म्यांमार के साथ रिश्तों को बढ़ाया जा सके. मौजूदा दौर में पाकिस्तान की तरह चीन म्यांमार का सबसे बडा इकॉनोमिक पार्टनर है.

भारत के एक्ट ईस्ट पॉलेसी से खौफ में चीन
म्यांमार चीन के लिए साउथ एशिया और साउथ इस्ट एशिया के बीच में पड़ने वाला एक अहम देश है. 2019 से 2030 तक के बीच चीन आर्थिक सहयोग के तहत इंफ़्रास्ट्रक्चर, एग्रिकल्चर, ट्रांसपोर्ट, ह्यूमन रिसोर्सेज, टैंकॉलेजी और टैलिकॉम के क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्लान पर काम कर रहा है. म्यांमार की उपयोगिता इसलिए भी चीन के लिए बढ़ जाती है, क्योंकि भारत सरकार अपने पुराने लुक इस्ट पॉलिसी को एक्ट इस्ट पॉलिसी से तब्दील कर चुका है. और इस इलाके में अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है. भारत चीन के लिये ये भविेष्य में एक बडा ख़तरा बन कर उभर रहा है. इसी वजह से चीन भारत को कमजोर करने के मकस्द से पूर्वोत्तर के राज्यों में सक्रिया उग्रवादी संगठनो को पैसा, हथियार और ट्रैनिंग भी दे रहा है. लेकिन अब वही विद्रोही गुट चीन के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं.

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