हाल ही में देश के प्रधान न्यायाधीश के पद से डी वाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) रिटायर हुए। पिछले नवंबर महीने में उनके रिटायरमेंट के बाद सुप्रीम कोर्ट के नए प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना बने।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने को लेकर केंद्र (Central Government) ने बड़ा बयान दिया है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस मुद्दे पर खुद अपना रुख साफ किया है।
जजों की रिटायरमेंट उम्र पर क्या कहा केंद्र (Central Government) ने?
हाल ही में राज्यसभा में जजों की सेवानिवृत्ति (Chief Justice Retirement) को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दिवंगत अरुण जेटली ने खुद कहा था कि रिटायरमेंट के बाद नए पद की लालसा रिटायरमेंट से पहले उनके फैसलों को प्रभावित करती है। इसके बाद उन्होंने मोदी सरकार को निशाना बनाया।
राघव ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार (Modi Government) रिटायर जजों को राज्यसभा सांसद के रूप में नामित कर रही है या उन्हें विभिन्न संस्थाओं के शीर्ष पदों पर नियुक्त कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि रिटायरमेंट के बाद जजों के लिए समय का अंतराल क्यों नहीं रखा जा रहा है? साथ ही उन्होंने पूछा कि जजों की रिटायरमेंट उम्र और पेंशन क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है?
इसके जवाब में केंद्रीय कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रिटायर जजों के लिए “कूलिंग ऑफ पीरियड” अर्थात रिटायरमेंट के बाद किसी पद पर नियुक्ति के बीच समय का अंतराल रखने का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है।
केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के लिए इस तरह के सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को न्यायिक संस्थाओं और ट्रिब्यूनल में रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति करनी ही होगी। साथ ही उन्होंने फिर स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
